मल मास के दौरान क्या करें एवं क्या ना करें

Created on: Mar, 14 2017 07:48 am in festival 2017

मल मास में सभी लोग अपने पापों को धोने के लिए पवित्र ग्रंथो को पाठ, दान पुण्य, नृत्य, भजन, मंत्र जाप, प्रार्थना, पवित्र स्नानादि करते हैं। इस दौरान यदि आप व्रत रखते हैं तो इन  बातों का ध्यान रखें:-

महीने के कुछ दिन या पूरे महीने आप पूरा  या आधा व्रत रख सकते हैं। भविष्योत्तर पुराण के अनुसार व्यक्ति को षुक्ल पक्ष के प्रथम उज्जवल पखवाड़े के षुरु कर कृष्ण पक्ष के अंतिम पखवाड़े तक रखना चाहिए।

व्यक्ति को अपने विचारों को साफ करना चाहिए तथा अपने षारीरिक सफाई का भी खास ध्यान रखना चाहिए।

व्यक्ति को सच बोलना चाहिए और धैर्यपूर्वक काम करना चाहिए। इस समय कम बोलने की सलाह भी दी जाती है। व्यक्ति को इस अवसर पर दान पुण्य भी जरुर करना चाहिए।

इस समय क्रोध एवं नकारात्मक होने से बचें। मांसाहारी भोजन का सेवन करने से भी बचें।

भक्तों को निरन्तर पूजा, हवन, व्रत एवं पाठ करना चाहिए।

व्यक्ति सुबह एवं षाम एक दीया जला सकते हैं तथा उसे पानी के बर्तन में रख सकते हैं। सभी चार दिषाओं में दीपक रखें तथा घर के मध्य में लाल एवं पीले फूलों के बीच भी एक दीपक रखें।

सुबह एवं षाम के समय गायत्री मंत्र, नव ग्रह षांति ष्लोक तथा महा मृत्युंजय मंत्र के साथ साथ भगवान गणेष, अपने ईष्ट देव, एक नक्षत्र, कुलदेवी एवं पितरों की भी पूजा करें।

भक्तों को सुबह भगवान विष्णु के ष्लोक का उचारण करना चाहिए तथा षाम के समय भगवान षिव एवं दुर्गा चालीसा का पाठ करना बेहतर रहेगा। इसके साथ ही हनुमान चालीसा भी सुनाई जा सकती है

भविष्योत्तर पुराण के अनुसार, व्यक्ति जो प्रतिदिन मल मास के दौरान जो व्रत एवं दान पुण्य करना चाहिए। यदि व्यक्ति 30 दिन तक व्रत नहीं कर सकता तो उसे ब्रहम मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए तथा भगवान विष्णु की अराधना कर पूजा करनी चाहिए।

हिमादरी के अनुसार अधिक मास में व्यक्ति को हर दिन भगवान सूर्य की पूजा करना लाभदायक है। इसके साथ ही अनाज, घी एवं गुड़ का दान करना चाहिए। भगवत गीता का अध्याय 15 पढ़ना भी लाभदायक होता है।

इस माह भक्तजन गोवर्धन पर्वत मथुरा श्री गिरिराज जी की परिक्रता के लिए भी जा सकते हैं।