अधिक मास

Created on: Mar, 14 2017 07:33 am in festival 2017

जब हिन्दू केलिन्डर के अनुसार एक चंद्र मास ज़्यादा  हो जाता है तो उससे अधिक मास कहते है.अधिक मास को मल मास और पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है.वेदों के अनुसार यह एक बहुत ही ज़रूरी महीना है . इस महीने मे हमेह यह सन्देश मिलता है की हम्ह सृष्टि के तत्वो  साथ एक बार फिर से जुड़ जाना चाहिए.सृष्टि के पाँच तत्व है हवा , पानी, धरती,आग, आत्मा,हमारी बुद्धि आदि. कहा जाता है कीजोह  मनुष्य  आध्यात्मिक बनाना चाहता है वह इस महीने मे बन सकता है.यह महीना आत्मा विकास ,आत्मा का प्रतिबिम्ब, आत्मा मूल्याङ्कन भी किया जाता है.माना जाता है की यह महीना अपनी आत्मा और भावना पेह ध्यान लगाने का महीना है.इस महीने मे आकाश के ग्रहो और मनुष्यो करे बीच सञ्चालन होता है.समय एक महत्वपूर्ण वस्तु है, जोह महीनो के जैसे आती है और पंख लगा  के उड़ जाती है.उपरवाले को सबसे असीम शक्ति माना गया है.हर चीज़ के लिए उसी से प्राथना की जाती है.शांति का मतलब यह नहीं है की किसी बिना शोर शराबह वाली जगह चले जाओ या अकेले बैठ जाओ.शांति तब मिलती है जब हमारे जीवन मे खुसी या दुःख दोनों से कोई ज़ायद फ़र्क़ नहीं पड़ता.  शांति हम्ह जब मिलती है जब सारी सही माइनो मे स्थिरता और शान्ति के साथ सब कुछ यानि की सारी परेशानिया और कथानियो को सहन करना सीख जाते है. अधिक मास भगवान् का तोफहा है जोह की हर ३ साल मे आता है और मनुष्य को इसका पूरा लाभ उठाना चाहिए.

अधिक मास 2015

अधिक मास २०१५ मे हिन्दू केलिन्डर के अनुसार १७ जून २०१५ से १६ जुलाई २०१५ तक है.इन् ३० दिनों को अधिक आषाढ़ मास कहा जाता है.इसके अनुसार २०१५ मे १३ महीने होंगेः बजाये १३.यह एक अच्छा और पवित्र महीना माना जाता है. इस महीने मे लोग प्रणायाम करते है, एड लिखते है पढ़ते है,तीर्थ यात्रा करते है.इस महीने मे कोई भी प्रयास नहीं करना चाहिए इन् मोह माया की चीज़ों लो प्राप्त करने के लिए.

अधिक मास मे क्या करे क्या करे

माना जाता है की कोई भी नया वाहन, नए गहने ,घर, दूकान विवाह या ऐसा कोई भी मांगलिक कार्य नहीं होना चाहिए.पुरुषोत्तम  मास्स  महात्यम जिससे पुरुषोत्तम ग्रन्थ भी कहा जाता है इस धार्मिक किताब मे अधिक मास का पूरा महत्व बताया गया है.प्रथम दिन किये जाने वाले उपवास या एक समय खाना खाया जाने वाले का पूर्ण डिस्क्रिप्शन पुरुषोत्तम ग्रन्थ मे बताया गया है.दान, दक्षणा देना इस महीने मे बहुत अच्छा और सुबह माना गया है.पूजा,व्रत,जाप,दान सब इस को अपनी इच्छा अनुसार करना ही चाहिए.जोह लोग अधिक मास मे व्रत या उपवास करते है उनके सारे पाप धूल जाते है.यह भी माना जाता है की अधिक मास म किया गया दान बहुत ही शुभ और फलदायी होता है. यह महीना जोह मनुष्य आध्यात्मिक बन चुके है या बनाना चाहते है उनके लिए बहुत ही शुभ है.