अधिक मास से कैसे करें मोक्ष की प्राप्ति

Created on: Mar, 14 2017 07:45 am in festival 2017

अनादीमाद्यं पुरुषोत्तमं श्रीकृष्णचंद्र निजभक्तं वत्सलम ॥

स्वं त्वं संख्यांदपति परात्परं राधा पतिं त्वां शरणं वृजाम्यह्म ॥

वैदिक पुराणों के अनुरूप अवंतिक नगरी में अधिक मास का आषाढ़ मास में आना बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। इस महीने में किया गया दान 3 गुना अधिक फल दिलाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कोई भी 2 महीने एक ही नाम से जाने जाते हैं हर 3 साल के बाद । जिस में पहले माह की अमावस्या से दूसरे माह की अमावस्या तक अधिक मास कहलाता है। अधिक मास को लोग अन्य नामों से भी जानतें हैं जैसे मल मास अथवा पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है।

अधिक मास का अत्यंत महत्व होता है, सभी भक्तजन अपने-अपने धर्म के अनुरूप  धार्मिक, पौराणिक, सप्तसागर की यात्रा करते हैं। उज्जैन की नगरी में पूर्व काल में कई ऋषि-मुनियों ने तपस्या की और  अपने तपोवन के देवताओं को प्रसन्न कर, अवंतिका में वास करने का उद्बोधन किया। इस कारण ही अवंतिका में महाकाल वन देवी देवताओं से भरा पूरा है।  अवंतिका नगरी में वैषाख मास में  अधिक मास के चलते समय कई धर्मों के श्रद्धालुजन कल्पवास करने आते हैं।

अधिक मास अथवा मल मास के संबंध में अनेक अनुभूति एवं उत्सुकता प्रचलित हैं। इस वर्ष अधिक मास 17 जून से शुरू होगा।  हिन्दू पंचांग में 12 माह होते हैं तथा जिन्हें चन्द्रमाह भी  कहा जाता है। एक  चन्द्र वर्ष में कुल 355 दिवस होते हैं और बारह चन्द्र मास मिलकर एक चन्द्र वर्ष बनाते हैं ।

महर्षि वषिष्ठ द्वारा की गई आकलन के अनुसार एक चन्द्र वर्ष  12 मास 16 दिवस एवं 4 घंटे के पश्चात आता  है। इस में  सूर्य संक्रांति नहीं होती है। वर्ष में 13 माह ही होते हैं परन्तु उन्हें 12 ही गिना जाता है। सूर्य तथा चन्द्र वर्ष में 10 दिन का अंतर आता है और यह 3 वर्ष, 30 दिन के  हो जातें  है। ऐसा होने पर अधिक मास आता है। सूर्य 12 राषियों का विचार करने में 365 दिन 15 घंटे एवं 23 पल लगाता है।

श्रद्धालु पुण्य पवित्र शिप्रा नदी में स्नान चार धाम की यात्रा प्रारंभ करती  हैं और अधिक मास में भक्त  ज़्यादा से ज़्यादा दान पुण्य करते हैं। उसके बदले में सुख-शांति , पुण्य-फल, समृद्धि एवं संतोष की मनोकामना करतें हैं । अधिक मास में चैरासी महादेव ,नौ नारायण एवं सप्तसागर की यात्रा अत्यंत फलदायी मन जाती है ।