Shani Transit 2017 Predictions for Sagittarius in Hindi

Created on: Sep, 07 2016 10:49 am in Predictions 2017

Shani Transit 2017 Predictions for Sagittarius in Hindi

शनि साढ़े साती 2017 – शनि साढ़े साती का धनु राशि पर प्रभाव

शनि की साढ़े साती या शनि की ढैयया की गणना चंद्र राशि के अनुसार अर्थात जन्म के समय जिस राशि में चंद्रमा होता है उसके वर्तमान में अर्थात गोचर में शनि की स्थिति के अनुसार होती है। जन्म कालिक चंद्र राशि से गोचर भ्रमण के दौरान शनि जब द्वादश भाव में आता है तो साढ़े साती का प्रारंभ हो जाता है तथा चंद्र राशि तथा चन्द्र राशि से दूसरे भाव में जब तक रहता है तब साढ़े साती बनी रहती है तथा जब तीसरी राशि में प्रवेश करता है तो साढ़े साती समाप्त हो जाती है। इसी प्रकार जब गोचर का शनि चंद्र राशि से चैथी तथा आठवीं राशि में प्रवेश करता है तब शनि की ढैयया प्रारंभ होती है।

शनि 26 जनवरी 2017 को वृष्चिक राशि से धनु राशि में प्रवेश करेगा। शनि की यह स्थिति साढे साती में परिर्वतन कर देगी। शनि के धनु में प्रवेश करते ही तुला राशि के जातकों को साढ़े साती से पूरी तरह से मुक्ति मिल जाएगी। इसके अलावा वृष्चिक राशि वालों के लिए शनि की साढ़े साती का अंतिम दौर प्रारंभ हो जाएगा तथा धनु वालों के लिए इसका मध्य भाग प्रारम्भ हो जाएगा एवं मकर राशि के जातकों के लिए शनि साढ़े साती प्रारम्भ हो जाएगी।

धनु राशि पर साढ़े साती का प्रभाव

मध्य दौर का प्रथम भाग – लगभग 13 महीने

इस दौरान अनावष्यक एवं अनजाना भय आपको हरदम परेषान कर सकता है। आप गलतफहमियों का षिकार हो सकते हैं। इस समय मानसिक दुर्बलता चरम पर होगी क्योंकि मन बेचैन रहेगा तथा सोचने समझने की शक्ति क्षीण होगी। आपको षारीरिक परेषानी भी संभावित है। इस समय वैवाहिक जीवन सबसे अधिक विपरीत प्रभाव देने वाला होगा। वैवाहिक जीवन में अत्याधीक सावधान रहने की जरुरत है। जिनकी कुंडली में पहले से दोश है उन्हें सावधान रहने की जरुरत है। इस समय जीवनसाथी के साथ वैचारिक मतभेद उत्पन्न हो सकते हैं तथा कुंडली में यदि अषुभ योग हैं तो जीवनसाथी की हानि, दूरी तथा तलाक की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इस समय कार्य व्यवसाय में भी समस्या हो सकती है। नौकरी छूटने या परिवर्तन होने का भी प्रबल योग बन रहा है। यदि जन्म कुंडली में शनि अच्छी स्थिति में है तो इन सबके विपरीत कार्य व्यापार में उन्नति, आर्थिक लाभ एवं मान सम्मान में बढ़ोतरी करने वाला होगा। परन्तु पारिवारिक एवं व्यक्तिगत जीवन तनावपूर्ण रहेगा तथा परिवार में अपमानजनक स्थिति उत्पन्न होगी।

मध्य दौर का द्वितीय भाग – लगभग 13 महीने

इस समय आपकी मनोस्थिति भोग विलास एवं कुछ लोगों के लिए दुव्र्यसन को प्रबलता देने वाली होगी। कुछ लोग इन सुखों का प्राप्त करने में व्यस्त होंगे। धन तथा कार्यों के मामलों में आप अत्यंत लापरवाही का बर्ताव करेंगे। अनमने से रह सकते हैं। आप किसी चीज की परवाह नहीं करेंगे तथा यह प्रवृत्ति आप पर हावी रहेगी। बिना दूर तक विचार किए आप बड़े फैसले ले सकते हैं परन्तु इसका परिणाम अच्छा नहीं होगा तथा इस बात में आपको अत्याधिक सर्तकता बरतनी चाहिए। कुछ लोगों के विवाह के पष्चात भी किसी और से सम्बन्ध रह सकते हैं।

मध्य दौर का अंतिम भाग – लगभग 4 माह

यह समय अत्यंत कठिन होगा। आपके सारे कार्य रुक जाएॅंगे तथा समस्त दाव उलटे पड़ सकते हैं। इस समय धन, साहस, बुद्धि, करीबी मित्र एवं परिवार के लोग आपको छोड़कर जा सकते हैं। इसके फलस्वरुप आर्थिक विपन्नता, मानसिक कलेश, बेरोजगारी, ऋण इत्यादि की स्थिति बन सकती है। इस समय आपको कुछ भी नहीं समझ आएगा। हर कार्य में रुकावट होगी। इस दौरान जो लोग बिना आर्थिक लाभ का सोचे धार्मिक, राजनैतिक एवं सामाजिक कार्यों में होंगे उन्हें लाभ प्राप्त होगा एवं मान सम्मान भी मिलेगा। यदि आपकी आयु 52 वर्ष से अधिक है तो आपको दिल से सम्बन्धित बिमारी हो सकती है। अन्य भागों की तरह ही यह भाग भी वैवाहिक जीवन के लिए प्रतिकूल रहने वाला है।

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