नवरात्रि की व्रत कथा

Created on: Nov, 26 2014 04:16 pm in Festival 2015

अश्विन शुक्ल की प्रतिपदा तिथि के नवमी के बीच के समय को नवरात्रा के नाम से जानते है| इन नवरात्रो का महत्व सभी नवरात्रो से ज्यादा माना जाता है|इस बार यह नवरात्रा 13 ओक्टोंबेर से 23 ओक्टोंबेर तक चलेंगे|प्रतिपदा तिथि के सभी प्रात: स्नान करके संकल्प लेकर देवी के सामने ज्योत लगते है|नवरात्रि के संबध मे कई कथाए प्रचलित है|

कुछ कथाए इस प्रकार है:-

एक कथा के अनुसार मा दुर्गा ने महिषासुर को मारकर सभी देवताओ को उसके प्रहार से मुक्त किया था|जब महिषासुर ने भगवान शिव की आराधना करके आसिम शक्तिया प्राप्त की थी,तब देवता भी उसे पराजित करने मे असमर्थ थे|खुद तीनो देवता यानी ब्रह्मा ,विष्णु,और महेश भी उसे नहीं हरा पाए थे,तब तीनो देवताओ ने अपनी शक्तिया मिलाकर देवी दुर्गा को जन्म दिया,और शक्तियो के तेज से जन्मी  मादुर्गा ने महिषासुर का विनाश किया और इस संसार को उसके प्रकोप से मुक्त किया|

एक अन्य कथा :- एक गाव मे एक ब्राह्मण रहता था, वह देवी मा का भक्त था| उसकी एक बेटी थी,उसका नाम सुमति था|उसका एक नियम था, वह रोज सुबह माता की पूजा अर्चना करता व हों हवन करता था|उसकी बेटी भी रोज देवी की पूजा करती थी|एक दिन वह खेलने मे व्यस्त थी तो उस दिन वह देवी की पूजा करने मे शामिल नहीं हो पायी|यह देख कर उसके पिताजी को बहुत गुस्सा आया और उसको श्राप दिया की उसकी शादी एक कोढ़ी से करेगी |यह सुनकर सुमति को बड़ा दुख हुआ पर उसने अपने पिता की कही बातो को मान लिया |श्राप के अनुसार सुमति के पिताजी ने उसकी शादी एक दरिद्र और कोढ़ी के साथ कर दिया|पिता का आशीर्वाद लेकर सुमति अपने पति के साथ चली गई|उसके पति खुद का घर नहीं होने की वजह से उसे रात जंगल मे ही बितानी पड़ी|माता से सुमति की यह दशा देखी नहीं गई, और सुमति के पूर्व मे की गई पूजा के पून्यो के प्रभाव मा प्रकट हुई|मा ने सुमति से कहा-बेटी मे तुझसे खुश होकर तुझे कोई वरदान देना चाहती हू तुझे क्या चाहिये? सुमति ने पूछा आप मुझसे क्यू खुश हे|मा ने कहा मे तेरे पूर्व जन्म के कामो से खुश हू टू पिछले जन्म मे एक भील स्त्री थी,और एक पतिव्रता स्त्री थी|एक दिन तेरे पति भील ने चोरी की और सिपाहियो ने तुम दोनो को पकड़कर जै मे बंद किया|और तुम्हे खाने को कुछ नहीं दिया|वो दिन नवरात्रा के थे इस प्रकार उन नो दिनो मे ना तुमने अन्न ग्रहण किया और ना ही जल पिया |उन दिनो मे जो व्रत तुमसे हुआ उसके प्रभाव से मे प्रसन्न होकर मे तुम्हे वरदान देना चाहती हू|सुमति ने कहा अगर आप मुझसे प्रसन्न हे तो मेरे पति को सारे रोगो से मुक्ति दे दीजिये|देवी की कृपा से उसके पति के सारे कोढ़ ठीक हो गए|

Nodinkamahatv,vratkatha