पूजा करने की विधी

Created on: Nov, 24 2014 07:09 am in Festival 2015

 इस  वर्ष  षारदीय नवरात्र 13 ओक्टोंबेर से प्रतिपदा से आरंभ होगी| हस्थ नक्षत्र प्रतिपदा के दिन नवरात्री का पहला दिन होगा|जिन लिगो को माता पर विशवस ही उनके लिये ये दिन बहुत ही शुभ माना जाएगा|जॉ लोग व्रत आदी रखते ही वे सभी सभी इसी दिन से उपवास शुरू करेंगे| षारदीय नवरात्र का प्रारम्भ अश्विन माह शुक्ला पक्ष की प्रतिपदा से होता हें इसलिये नव का अर्थ ‘नया’|पर्यवरण मे बदलाव इन्ही नवरात्री से प्रारम्भ होता हें सर्दिया बढने लगती हें,और सेहत को ध्यान मे रखते हुए नो दिन व्रत रखने की पर्मपरा बनाई गई हें|इन दीनो लोग अपना ध्यान चिंतन और मनन मे लगाकर शक्तिशाली हो का अनुभव लेकर सत्विक भोजन करते हें| ऐसा माना जता ही की ऐसा करने स्वस्थ अछा रहता है, और पुण्य प्राप्त होता है |इन नो दीनो को देवी की प्रार्थना का दिन भी कहा जाता है|इन नो दीनो  मे देवी के रुपो की प्रार्थना की जाती है|  एक वर्ष मे छः माह के अन्त्राल मे नवरात्र का अयोजन होता है, पहला चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा एवम दूसरा अश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को आरंभ होता है| परम्परा के अनुसार शारदिया नवरात्र को अधिक महत्व दिया जाता है|

महत्व:-  इन नो दीनो मे लोग अपनी इच्छा अनुसर उपवास एवम भजन करते है ,और देवी के पीठो पर जाकर अपनी अराधना करते है| जो देवी के शक्तिपीठो पर नहीं जा सकते वे पास के मंदिरो मे अपनी अराधना पुरी करते है | नवरात्री का मतलब नव अहोरात्रो,रात्रि शब्दसिद्धी प्राप्त करने का प्रतीक है |जिन्हे विशेष सिद्धी प्राप्त करना होती है उनके लिये रात्रि का समय उत्तम  होता है|

पूजन करने के लिये रात्रि का समय :- पूजन करने के लिये रात्रि का समय शुभ माना जाता है,क्योकी रात्रि मे सारी बधाए खत्म हो जाती है,और मन भी एकाग्र रहता है |रात्रि मे मंत्रो का जाप करना आसान हो जाता है,और आत्मशक्ति को प्राप्त करना आसान हो जाता है। नवरात्री का आरंभ देवी का कलश स्थापित कर की जाती है,जो भी मंत्र एवम तंत्र का कार्य भी षारदीय नवरात्री मे ही शुरू किया जाता है,बीना मंत्र के की गई देवी की अराधना पूर्न नहीं मानी जाती है| ग्रहो को शांत करने के लिये मंत्रो का जाप किया जाता है ,सुख एवम शान्ती के लिये ग्रहो की अराधना अच्छी मानी जाती है। नवरात्री के दीनो मे ग्रहो की पूजा करना अच्छा माना जाता है,एसा ऐसा करने से सारी इच्छाए पूर्ण होती हैवर्ष का पहला नवरात्र|13 ओक्टोंबेर 2015 है| इन दो नवरात्र के अतिरिक्त दो और नवरात्र ही जो साल मे दो  बार आते ही जिन्हे गुप्त नवरात्र कहा जाता है| जिसमे से पहला आषाढ शुक्ल पक्ष, एवम दूसरा  माघ शुक्ल पक्ष को मानाया जाता है, गुप्त सिद्धी प्राप्ति के लिये ये गुप्त नवरात्री शुभ मनी जाती है | आत्मशक्ति की मजबूति के लिये ये नवरात्री अछी है,और इन नवरात्रो मे पूजन कर्ण से साधक की मनोकामनाये पूर्ण होती है,दान ,पुण्य करना भी अच्छा होता है|apne ghar me devi ki kese kare puja.