नवरात्र की तिथि

Created on: Nov, 24 2014 10:22 am in Festival 2015

वर्ष 2015 से षारदीय नवरात्र का आरंभ दिनांक 13 ओक्टोंबेर से अश्विन शुक्ल की प्रतिपदा से होगा |इसी दिन से नवरात्र का पहला नवरात्र होगा |लोग जप,तप,हवन. उपवास आदि कर पुण्य प्राप्त करते है |

गणेश जी की पूजा:-  नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना की जाती हे अर्थात् कलश स्थापित किया जाता है|हमारे यहा देवी पूजा का महत्व है और किसी भी पूजा को प्रारंभ करने से पहले हम गणेश जी की पूजा करते है,और नवरात्रि के आखिरी दिन छोटी कन्याओ को भोजन कराया जाता है| प्रात: सूर्योदय से घाट की स्थापना करना आरंभ हो जाता है,नवरात्रि के पहले दिन माता के पहले रूप शैलपुत्री की आराधना की जाती हे कई लोग जागरण करके भी उपवास करते है|इस दिन  से मिट्टी के बर्तन मे मिट्टी डालकर जो बोए जाते है,देवी का पहला स्वरूप शैलपुत्री राजा हिमालय की पुत्री है,जो देवी पर्वती के नाम से जानी जाती हे|

घट की स्थापना विधि:- अश्विन शुक्ल की प्रतिपदा से ही कलश की स्थापना कर नवरात्रि का आरंभ किया जाता है|शास्त्रो मे कलश को गणेश जी का स्वरूप माना गया है, ,इसलिये किसी भी पूजा को प्रारंभ करने से पहले कलश स्थापना  करते है|भूमि को धोकर एवं शुद्ध करके कलश को स्थापित किया जाता है|पहले के लोग सात जगहो से मिट्टी लाकर उसे लीपकर कलश् की स्थापना करते थे |

देवी के पहले रूप का पूजन:- सर्वप्रथम सुपारी,सिक्का,सात प्रकार की मिट्टी कलश मे रखी जाती है ,उसके बाद सात प्रकार का अनाज और जो बोए जाते हे जिन्हे नवरात्रि के आखिरी दिन काटा जाता है| ‘जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी, दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा, स्वधा नामोस्तुते’| इस मंत्र का जाप करने से जीवन मे खुशहाली आती है और जीवन सुख शांती से व्यतीत होता हे| इन सब के बाद देवी की मूर्ति की स्थापना की जाती हे देवी की मूर्ति मंदिर के बीचो बीच की जाती है |देवी एक और गणेश जी एवं दूसरी और माता सरस्वती विराज मान होती है| देवी की पूजा हल्दी,कुंकुम रोली,एवं चंदन से की जाती है और अंत मे देवी की आरती की जाती है| नवरात्री मे ग्रहो की शान्ती:- प्रथम दिन मंगल गृह की शान्ती,द्वितिया के दिन राहु गृह की शान्ती,तृतिया के दिन ब्रहस्पती गृह की शान्ती,चतुर्थी के दिन शनि गृह की शान्ती,पंचमी के दिन बुध गृह की शान्ती,शष्ठी के दिन केतु गृह की शान्ती,सप्तमी के दिन शुक्र गृह की शान्ती,अश्टमी के दिन सूर्य गृह की शान्ती,नवमी के दिन चंद्रमा की शान्ती की जाती है| प्रतिपदा के दिन मंगल गृह की शान्ती की जाती है,इसलिये मुंगा या लाल अकिक की माला से 108 बर मंगल बिज मंत्र का जाप करना चाहिये ,और बाद मे मंगल कवच का पाठ भी करना चाहिये | नवरात्री मे देवी की पूजा के साथ भगवान राम एवम हनुमान की भी पूजा कर्ण चाहिये |अखंड रामायन,सुन्दर कांड का पाठ भी करना चाहिये| नवरात्री  मे देवी की पूजा विधी विधान से करने से मन की सारी इछाए पूर्न हो जाती ही और बाधाए भी खत्म हो जाती है |

kanya bhooj,devi ki stapna,graho ki shanti.