नवरात्रि की शुरुआत

Created on: Nov, 27 2014 05:06 pm in Festival 2015

13 ओक्टोंबेर से नवरात्रि का आरंभ होगा जो 23 ओक्टोंबेर तक चलेगा| नक़व्रात्रि मे लोग सुबह स्नान कर पूजा पाठ करते है|मिट्टी के बर्तन मे जो बोये जाते हे,जिन्हे नवरात्रि के आखिरी दिन काटे जाते है| घटस्थापित किया जाता है,नो दिन तक दुर्गा सप्तशती का पथ किया जाता है|कई लोग इस बीच राम जी प्रतिमा को स्थापित करते है और रामलीलाये भी होती है| कई लोग देवी की स्तुति भी करते है जो इस प्रकार है,जो शाम को की जाती है:-

मंगल की सेवा सुन मेरी देवा हाथ जोड़ कर तेरे द्वार खडे।

पान सुपारी ध्वजा नारियल ले ज्वाला तेरे भेंट धरें ।।

सुन जगदम्बे कर न विलम्बे सन्तन की भण्डार भरे।

सन्तन प्रतिपाली सदा कुशाली जै काली कल्याणी करे।। मंगल की ….

बुद्धि विधाता तू जगमाता मेरा कारज सिद्धि करे।

चरण कमल का लिया आसरा शरण तुम्हारी आन परे।। मंगल की ….

अब जब पीर परे भक्तन पर तब तब आय सहाय करे।

सन्तन सुखदाई सदा सहाई सन्त खडे जयकार करे।।मंगल की ….

बार-बार तैं सब जग मोह्रो तरूणी रुप अनूप घरे।

माता होकर पुत्र खिलावे कहीं भार्या भोग करे।।मंगल की ….

सन्तन सुखदाई सदा सहाई सन्त खडे जयकार करे।

सन्तन सुखदाई सदा सहाई सन्त खडे जयकार करे।।मंगल की ….

ब्रह्रा विष्णु महेश सहसफल लिये भेंट तेरे द्वार खडे।

अटल सिंहासन बैठी माता सिर सोने का छत्र फिरे।।

बार शनीचर कुंकुम वरणों जब लौ कंठ कर हुकुम करे।

खडग खप्पर त्रिशूल हाथ लिये रक्त बीज को भस्म करें।।

शुम्भ निशुम्भ को क्षण में मारे महिषासुर को पकड दले।

सन्तन सुखदाई सदा सहाई सन्त खडे जयकार करे।।मंगल की ….

आदितावार आदि को बीरा जन अपने को कष्ट हरे।।

कोप होयकर दानव मारे चण्ड मुण्ड सब चूर करे।

जब तुम देखो दया रुप हो पल में संकट दूर करे।

सौम्य स्वभाव धरयो मेरी माता जन की अरज कबूल करें।।

सिंह पीठ कर चढी भवानी अटल भवन में राज करें।

ब्रह्मा वेद पढे तेरे द्वारे शिव शंकर जी ध्यान धरे।।

इन्द्र कृष्ण तेरे करे आरती चंवर कुबेरे डुलाय रहे।

जय जननी जय मातु भवानी अटल भवन में राज्य करे।।

देवी का पूजन:- ये तो हम जानते हे की साल मे दो बार नवरात्रि आते है,पहले तो चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होकर चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की नवमी तक चलती है, और दूसरी अश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होकर अश्विन मास की नवमी तक चलती हे| जिसे हम शारदीय नवरात्रा के नाम से जानते हे|इस नवरात्रि के बाद दशेहरा आता है| नवरात्रि मे देवी की आराधना पूरे श्रध्हा के साथ की जाती हे | पूजा विधि:-सर्वप्रथम जहा देवी को विराज मान करना हे उस जगह को स्वच्छ जल से साफ किया जाता हे भगवान श्री गणेश की पूजा करने के के लिये कलश को स्थपित किया जाता है |कलश् को गणेश जी का प्रतिरूप माना जाता हे,इसलिये कोई भी पूजा करने से पहले कलश को स्थापित किया हे, कलश् के चारो और पांच प्रकार के पट्टे लगाए जाते है और चंदन का तिलक लगाया जाता है| |

Puja ka tarika Devi ma ki stuti,